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ऐसी वाणी बोलिये
ऐसी वाणी बोलिये

 

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गुरुसेवा सबहुन पर भारी
गुरुसेवा सबहुन पर भारी

 गुजरात के सुरेन्द्रनगर जिले के कांत्रोडी गाँव में मेघजी नाम का गरीब लड़का एक व्यापारी के यहाँ गाय चराने की नौकरी करता था | एक दिन जंगल में गाय चराते समय उसे गुफा में एके समाधिस्थ महात्माजी के दर्शन हुए | मेघजी ने प्रणाम किया | महात्माजी ने उसके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और कहा : “मेघजी ! मुझे गाय का दूध पीना है | मुझे एक लोटा दूध दुहकर दो |”

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जो सद्गुरु से करता तादाम्य विश्व गाता उसका माहात्म्य
जो सद्गुरु से करता तादाम्य विश्व गाता उसका माहात्म्य

रोम के बादशाह ने सोने की सलाई और सोने-चाँदी व रत्नों से जडित डिब्बी में दो आँखों में लगा सकें इतना सुरमा भारत के राजा को भेजा और कहलवाया कि ‘कोई भी अंधा आदमी अगर इस सुरमे को लगायेगा तो वाह देखने लग जायेगा |’ वह भारत के राजा की परीक्षा लेना चाहता था कि ‘भारत के चक्रवर्ती राजा और उनके मंत्रियों की सुझबुझ अगर ऊँची है तो हम रोम के लोग उनसे मैत्री करेंगे और अगर उनकी सुझबुझ छोटी है तो हम उन पर चढ़ाई करके उन्हें हरायेंगे |

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वाहवाही का गुरुर, कर दे योग्यता चूर-चूर
वाहवाही का गुरुर, कर दे योग्यता चूर-चूर

शिष्य के जीवन में जो भी चमक,आभा, विशेषता दिखती है, वाह उसकी इस जन्म की या अनेकों पूर्वजन्मों की गुरुनिष्ठा का ही फल है | कभी-कभी प्रसिद्धि के शिखर पर चढ़ते-चढ़ते शिष्य मानने लगता है कि यह प्रतिभा उसकी खुद की है | बस, तभी से उसका पतन शुरू हो जाता है | परंतु गुरुदेव ऐसे करुणावान होते है कि वे शिष्य को पतन की खाई में गिरने से बचाते ही नहीं बल्कि उसकी उन्नति के लिए भी हर प्रयास करते रहते है |
 

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संत – राष्ट्र के प्राणाधार
संत – राष्ट्र के प्राणाधार

  कैवर्त राज्य का राजा था तोमराज | पडोसी राज्य से आये किसी ब्यक्ति का कैवर्त में अपमान हो गया | वह अपने राज्य में जाकर बोला : “कैवर्त-सम्राट तोमराज के राज्य में हमारे राज्य के नागरिकों का अपमान हो रहा है |”

राजा विश्वजित तक बात पहुँची | राजा ने कहा : “मेरे राज्य के झाड़ू लगनेवाले का भी कोई अपमान करेंगा तो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे | हमारे नागरिक हमारी शान है | नागरिक है तो राजा है | जब नागरिक का अपमान होता है तो राजा किस काम का ? जाओ सेनापति ! कैवर्त-सम्राट तोमराज के राज्य को घेरा डालो और उस राज्य को परास्त करने का दृढ़ निश्चय करो | जरूरत पड़ी तो मैं भी आ जाता हूँ |”
सेनापति : “नहीं राजन ! हम निपटा लेंगे |”

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