१४ फेब्रुअरी मातृ-पितृ पूजन दिवस पर पूज्य बापूजी का संदेश

 

पूज्य संत श्री आशारामजी बापू का परम हितकारी संदेश

प्रेमदिवस (वेलेन्टाइन डे) के नाम पर विनाशकारी कामविकार का विकास हो रहा है, जो आगे चलकर चि‹डचि‹डापन, डिप्रेशन, खोखलापन, जल्दी बुढापा और मौत लानेवाला दिवस साबित होगा । अतः भारतवासी इस अंधपरम्परा से सावधान हों !

इन्नोसन्टी रिपोर्ट कार्डङ्क के अनुसार २८ विकसित देशों में हर साल १३ से १९ वर्ष की १२ लाख ५० हजार किशोरियाँ गर्भवती हो जाती हैं । उनमें से ५ लाख गर्भपात कराती हैं और ७ लाख ५० हजार कुँवारी माता बन जाती हैं । अमेरिका में हर साल ४ लाख ९४ हजार अनाथ बच्चे जन्म लेते हैं और ३० लाख किशोर-किशोरियाँ यौन रोगों के शिकार होते हैं ।

यौन संबंध करनेवालों में २५% किशोर-किशोरियाँ यौन रोगों से पी‹िडत हैं । असुरक्षित यौन संबंध करनेवालों में ५०% को गोनोरिया, ३३% को जैनिटल हर्पिस और एक प्रतिशत को एड्स का रोग होने की सम्भावना है । एड्स के नये रोगियों में २५%  रोगी २२ वर्ष से छोटी उम्र के होते हैं । आज अमेरिका के ३३% स्कूलों में यौन शिक्षा के अंतर्गत ‘केवल संयमङ्क की शिक्षा दी जाती है । इसके लिए अमेरिका ने ४० करो‹ड से अधिक डॉलर (२० अरब रुपये) खर्च किये हैं।  मुझमें - दोनों में उसी राम-परमात्मा, ईश्वर की चेतना है, उसे प्रणाम हो । ऐसी दिव्य भावना को ‘प्रेमङ्क कहते हैं । निर्दोष, निष्कपट, निःस्वार्थ, निर्वासनिक स्नेह को ‘प्रेमङ्क कहते हैं । इस प्रकार एक-दूसरे से मिलने पर भी ईश्वर की याद ताजा हो जाती थी, पर आज ऐसी पवित्र भावना तो दूर की बात है, पतन करनेवाले ‘आकर्षणङ्क को ही ‘प्रेमङ्क माना जाने लगा है ।

प्रेमदिवस जरूर मनायें लेकिन प्रेमदिवस में संयम और सच्चा विकास लाना चाहिए । युवक-युवती मिलेंगे तो विनाश-दिवस बनेगा । इस दिन बच्चे-बच्चियाँ माता-पिता का आदर-पूजन करें और उनके सिर पर पुष्प रखें, प्रणाम करें तथा माता-पिता अपनी संतानों को प्रेम करें । संतानें अपने माता-पिता के गले लगें । इससे वास्तविक प्रेम का विकास होगा । बेटे-बेटियाँ माता-पिता में ईश्वरीय अंश देखें और माता-पिता बच्चों में ईश्वरीय अंश देखें । तुम भारत के लाल और भारत की लालियाँ (बेटियाँ) हो । प्रेमदिवस मनाओ, अपने माता-पिता का सम्मान करो और माता-पिता बच्चों को स्नेह करें । करोगे न बेटे ऐसा! पाश्चात्य लोग विनाश की ओर जा रहे हैं । वे लोग ऐसे दिवस मनाकर यौन रोगों का घर बन रहे हैं, अशांति की आग में तप रहे हैं । उनकी नकल तो नहीं करोगे ?

मेरे प्यारे युवक-युवतियो और उनके माता-पिता ! आप भारतवासी हैं । दूरदृष्टि के धनी ऋषि-मुनियों की संतान हैं । ‘वेलेन्टाइन डेङ्क के नाम पर बच्चों, युवान-युवतियों के ओज-तेज का नाश हो, ऐसे दिवस का त्याग करके माता-पिता और संतानो ! प्रभु के नाते एक-दूसरे को प्रेम करके अपने दिल के परमेश्वर को छलकने दें । काम-विकार नहीं, रामरस, प्रभुप्रेम, प्रभुरस...

 

मातृदेवो भव । पितृदेवो भव ।

 

बालिकादेवो भव । कन्यादेवो भव । पुत्रदेवो भव ।

* माता-पिता का पूजन करने से काम राम में बदलेगा, अहंकार प्रेम में बदलेगा, माता-पिता के आशीर्वाद से बच्चों का मंगल होगा ।

पाश्चात्यों का अनुकरण आप क्यों करो ? आपका अनुकरण करके वे सद्भागी हो जायें ।

जो राष्टड्ढभक्त नागरिक यह राष्टड्ढहित का कार्य करके भावी सुदृ‹ढ राष्ट्र-निर्माण में साझेदार हो रहे हैं, वे धनभागी हैं और जो होनेवाले हैं उनका भी आवाहन किया जाता है ।

 


Contact Us | Legal Disclaimer | Copyright 2012 by Balsanskar Kendra
This site is best viewed with Microsoft Internet Explorer 5.5 or higher under screen resolution 1024 x 768